श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.293.9 
हुत्वा शतसहस्रं स सावित्र्या राजसत्तम:।
षष्ठे षष्ठे तदा काले बभूव मितभोजन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
राजाओं में श्रेष्ठ अश्वपति ब्राह्मणों की सहायता से गायत्री मन्त्र से एक लाख हवन करके दिन के छठे भाग में ही अल्प भोजन करते थे॥9॥
 
Ashwapati, the best of kings, used to eat limited food in one-sixth part of the day after offering one lakh oblations with the help of Brahmins with the Gayatri Mantra.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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