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mahabharat 3.293.7: राजा अश्वपति क्षमाशील, सत्यनिष्ठ और संयमी होते हुए भी सन्तानहीन थे। जब बहुत आयु बीत गई, तब वे इस कारण अत्यन्त दुःखी हुए ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.293.7 
क्षमावाननपत्यश्च सत्यवाग् विजितेन्द्रिय:।
अतिक्रान्तेन वयसा संतापमुपजग्मिवान्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजा अश्वपति क्षमाशील, सत्यनिष्ठ और संयमी होते हुए भी सन्तानहीन थे। जब बहुत आयु बीत गई, तब वे इस कारण अत्यन्त दुःखी हुए ॥7॥
 
King Ashwapati, in spite of being forgiving, truthful and self-controlled, was childless. When a considerable age had passed, he became very sad because of this. ॥7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)