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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण
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श्लोक 5
श्लोक
3.293.5
आसीन्मद्रेषु धर्मात्मा राजा परमधार्मिक:।
ब्रह्मण्यश्च महात्मा च सत्यसंधो जितेन्द्रिय:॥ ५॥
अनुवाद
प्राचीन काल की बात है, मद्रदेश में एक अत्यन्त धर्मात्मा राजा राज्य करता था। वह ब्राह्मणभक्त, विशाल हृदयवाला, सत्यवादी और जितेन्द्रिय था।
It is a matter of ancient times, a very pious king used to rule in Madradesh. He was a Brahmin-devotee, big-hearted, truthful and a Jitendriya. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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