श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.293.41 
एवं तीर्थेषु सर्वेषु धनोत्सर्गं नृपात्मजा।
कुर्वती द्विजमुख्यानां तं तं देशं जगाम ह॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार राजकुमारी सावित्री विभिन्न देशों में गयीं, सभी तीर्थ स्थानों पर गयीं और श्रेष्ठ ब्राह्मणों को धन दान किया।
 
In this manner Princess Savitri went about the various countries, visiting all the pilgrimage places and donating money to the best brahmins.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि पतिव्रतामाहात्म्यपर्वणि सावित्र्युपाख्याने त्रिनवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत पतिव्रतामाहात्म्यपर्वमें सावित्री-उपाख्यानविषयक दो सौ तिरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४१ १/२ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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