श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.293.4 
मार्कण्डेय उवाच
शृणु राजन् कुलस्त्रीणां महाभाग्यं युधिष्ठिर।
सर्वमेतद् यथा प्राप्तं सावित्र्या राजकन्यया॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय बोले, "राजा युधिष्ठिर! मैं तुम्हें बताता हूँ कि राजकुमारी सावित्री ने किस प्रकार पतिव्रता आदि सभी सद्गुण प्राप्त किये थे, जो कुलीन स्त्रियों के लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है। सुनो।"
 
Mārkaṇḍeya said, "King Yudhishthir! I shall tell you how Princess Savitri had attained all the virtues like fidelity to her husband, which are the greatest good fortune for women of noble families. Listen."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)