श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.293.37 
मार्कण्डेय उवाच
एवमुक्त्वा दुहितरं तथा वृद्धांश्च मन्त्रिण:।
व्यादिदेशानुयात्रं च गम्यतां चेत्यचोदयत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं: युधिष्ठिर! अपनी पुत्री से ऐसा कहकर राजा ने अपने वृद्ध मन्त्रियों को आदेश दिया: तुम सब लोग यात्रा के लिए आवश्यक सामान (वाहन आदि) लेकर सावित्री के साथ जाओ।
 
Mārkaṇḍeya says: Yudhishthir! Having said this to his daughter, the king ordered his old ministers: You all should take the necessary things for the journey (vehicles etc.) and go with Savitri.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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