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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण
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श्लोक 36
श्लोक
3.293.36
इदं मे वचनं श्रुत्वा भर्तुरन्वेषणे त्वर।
देवतानां यथा वाच्यो न भवेयं तथा कुरु॥ ३६॥
अनुवाद
मेरी यह बात सुनकर तुम शीघ्रता से अपने पति की खोज करो और कुछ ऐसा करो कि मैं देवताओं की दृष्टि में अपराधी न बन जाऊँ।
After hearing this from me, hurry up and search for your husband. Do something so that I do not become a criminal in the eyes of the gods.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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