श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.293.34 
श्रुतं हि धर्मशास्त्रेषु पठॺमानं द्विजातिभि:।
तथा त्वमपि कल्याणि गदतो मे वच: शृणु॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
कल्याणी! मैंने ब्राह्मणों से धर्मशास्त्रों के विषय में जो सुना है, वह मैं तुमसे कह रहा हूँ। तुम भी उसे सुनो।
 
Kalyani! I am telling you what I have heard from the Brahmins regarding the religious scriptures. You should also listen to it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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