श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.293.33 
प्रार्थित: पुरुषो यश्च स निवेद्यस्त्वया मम।
विमृश्याहं प्रदास्यामि वरय त्वं यथेप्सितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तुम जिस आदमी को अपना पति बनाना चाहती हो, उससे मेरा परिचय करा दो; फिर मैं सोच-विचारकर तुम्हारा उससे विवाह करा दूँगा। तुम अपनी पसंद का वर चुन सकती हो।
 
Introduce me to the man you want as your husband; then I will think over it and get you married to him. You may choose the groom of your choice.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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