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श्लोक  3.293.30 
साभिवाद्य पितु: पादौ शेषा: पूर्वं निवेद्य च।
कृताञ्जलिर्वरारोहा नृपते: पार्श्वमास्थिता॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
सबसे पहले उसने प्रसाद और अन्य चीज़ें अर्पित कीं और अपने पिता के चरणों में झुकी। फिर वह सुंदरी हाथ जोड़कर अपने पिता के पास खड़ी हो गई।
 
First she offered prasad and other things and bowed down at the feet of her father. Then the beautiful girl stood beside her father with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)