श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.293.29 
तत: सुमनस: शेषा: प्रतिगृह्य महात्मन:।
पितु: समीपमगमद् देवी श्रीरिव रूपिणी॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह इष्टदेव का प्रसाद ग्रहण करके लक्ष्मीदेवी के समान सुशोभित होकर अपने पितामह के पास गई॥29॥
 
Thereafter, taking the offerings of the presiding deity, she went near her great father, adorned like the goddess Lakshmidevi. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)