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mahabharat 3.293.28: एक दिन, एक त्यौहार के अवसर पर, सावित्री उपवास और स्नान करके भगवान के दर्शन के लिए गई। विधिपूर्वक अग्नि में आहुति देने के बाद, उसने ब्राह्मणों से स्वस्ति मंत्र पढ़वाया।   |   mahabharat अध्याय 3.293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.293.28 
अथोपोष्य शिर:स्नाता देवतामभिगम्य सा।
हुत्वाग्निं विधिवद् विप्रान् वाचयामास पर्वणि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
एक दिन, एक त्यौहार के अवसर पर, सावित्री उपवास और स्नान करके भगवान के दर्शन के लिए गई। विधिपूर्वक अग्नि में आहुति देने के बाद, उसने ब्राह्मणों से स्वस्ति मंत्र पढ़वाया।
 
One day, on the occasion of a festival, Savitri went to see the deity after fasting and taking a bath. After offering oblations in the fire as per the prescribed rituals, she had the Brahmins recite the Swasti mantra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)