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mahabharat 3.293.27: उसके नेत्र पूर्णतः खिले हुए नीले कमल की पंखुड़ियों के समान सुन्दर थे। वह अपनी कांति से प्रज्वलित हो रही थी। उसके तेज से मोहित होने के कारण कोई भी राजा या राजकुमार उससे विवाह नहीं कर सकता था॥27॥   |   mahabharat अध्याय 3.293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.293.27 
तां तु पद्मपलाशाक्षीं ज्वलन्तीमिव तेजसा।
न कश्चिद् वरयामास तेजसा प्रतिवारित:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उसके नेत्र पूर्णतः खिले हुए नीले कमल की पंखुड़ियों के समान सुन्दर थे। वह अपनी कांति से प्रज्वलित हो रही थी। उसके तेज से मोहित होने के कारण कोई भी राजा या राजकुमार उससे विवाह नहीं कर सकता था॥27॥
 
Her eyes were as beautiful as the fully bloomed blue lotus petals. She appeared to be blazing with her radiance. Because of being awestruck by her radiance, no king or prince could marry her.॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)