Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.293.26: उसके शरीर का कटि भाग अत्यंत सुन्दर था और नितम्ब गठीले थे। वह सोने की बनी हुई मूर्ति के समान जान पड़ती थी। उसे देखकर सब लोगों को ऐसा प्रतीत होता था कि मानो कोई दिव्य अप्सरा आ गई हो॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.293.26 
तां सुमध्यां पृथुश्रोणीं प्रतिमां काञ्चनीमिव।
प्राप्तेयं देवकन्येति दृष्ट्वा सम्मेनिरे जना:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उसके शरीर का कटि भाग अत्यंत सुन्दर था और नितम्ब गठीले थे। वह सोने की बनी हुई मूर्ति के समान जान पड़ती थी। उसे देखकर सब लोगों को ऐसा प्रतीत होता था कि मानो कोई दिव्य अप्सरा आ गई हो॥ 26॥
 
The waist portion of her body was extremely beautiful and her buttocks were plump. She looked like a statue made of gold. Seeing her, everyone believed that a celestial nymph had arrived.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)