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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.293.25 
सा विग्रहवतीव श्रीर्व्यवर्धत नृपात्मजा।
कालेन चापि सा कन्या यौवनस्था बभूव ह॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजकुमारी देवी लक्ष्मी के स्वरूप के समान बड़ी हुई और समय के साथ वह युवावस्था में प्रवेश कर गई।
 
The princess grew up like the embodiment of Goddess Lakshmi and in due course she entered her youth. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)