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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण
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श्लोक 23
श्लोक
3.293.23
प्राप्ते काले तु सुषुवे कन्यां राजीवलोचनाम्।
क्रियाश्च तस्या मुदितश्चक्रे च नृपसत्तम:॥ २३॥
अनुवाद
समय आने पर रानी ने कमल-नेत्रों वाली कन्या को जन्म दिया और श्रेष्ठ घुड़सवार ने बहुत प्रसन्न होकर उसका जातकर्म आदि संस्कार करवाया॥23॥
When the time came, the queen gave birth to a lotus-eyed girl and the best horseman became very happy and got her caste rituals etc. performed. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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