श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.293.22 
राजपुत्र्यास्तु गर्भ: स मालव्या भरतर्षभ।
व्यवर्धत तदा शुक्ले तारापतिरिवाम्बरे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! अश्वपति की पत्नी मालवदेश की राजकुमारी थी। उसका वह गर्भ आकाश में उज्ज्वल चन्द्रमा के समान दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा। 22॥
 
Bharatshrestha! Ashvapati's wife was the princess of Malavadesh. That womb of hers started growing day by day like the bright-sided moon in the sky. 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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