राजपुत्र्यास्तु गर्भ: स मालव्या भरतर्षभ।
व्यवर्धत तदा शुक्ले तारापतिरिवाम्बरे॥ २२॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! अश्वपति की पत्नी मालवदेश की राजकुमारी थी। उसका वह गर्भ आकाश में उज्ज्वल चन्द्रमा के समान दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा। 22॥
Bharatshrestha! Ashvapati's wife was the princess of Malavadesh. That womb of hers started growing day by day like the bright-sided moon in the sky. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥