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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.293.20 
अन्तर्हितायां सावित्र्यां जगाम स्वपुरं नृप:।
स्वराज्ये चावसद् वीर: प्रजा धर्मेण पालयन्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जब सावित्रा देवी अदृश्य हो गईं, तो वीर राजा अश्वपति अपने नगर में वापस चले गए और अपने राज्य में रहने लगे तथा अपनी प्रजा का धर्मपूर्वक पालन करने लगे।
 
When Savitra Devi disappeared, the valiant King Aswapati went back to his city and started living in his kingdom, looking after his subjects righteously.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)