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श्लोक 3.293.19  |
मार्कण्डेय उवाच
स तथेति प्रतिज्ञाय सावित्र्या वचनं नृप:।
प्रसादयामास पुन: क्षिप्रमेतद् भविष्यति॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| मार्कण्डेय कहते हैं - हे राजन! सावित्री देवी के वचन सुनकर राजा ने 'बहुत अच्छा' कहकर उनकी आज्ञा का पालन करने का वचन दिया और यह भविष्यवाणी शीघ्र ही सत्य हो, इस आशय से पुनः सावित्री देवी को प्रसन्न किया॥ 19॥ |
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| Mārkaṇḍeya says - O King! After listening to Savitri Devi's words, the king said 'very good' and pledged to follow her orders and once again pleased Savitri Devi with the intention that this prophecy may come true soon.॥ 19॥ |
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