श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.293.14 
अश्वपतिरुवाच
अपत्यार्थ: समारम्भ: कृतो धर्मेप्सया मया।
पुत्रा मे बहवो देवि भवेयु: कुलभावना:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अश्वपति बोले - देवि! मैंने धर्म प्राप्ति और संतान प्राप्ति की इच्छा से यह अनुष्ठान प्रारम्भ किया है। आपकी कृपा से मुझे अनेक पुत्र प्राप्त हों, जो मेरे वंश को आगे बढ़ाएँ।॥14॥
 
Ashwapati said - Devi! I started this ritual with the desire to attain Dharma and to have children. May I be blessed with many sons who will carry forward my lineage by your grace. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)