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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण
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श्लोक 12
श्लोक
3.293.12
सावित्र्युवाच
ब्रह्मचर्येण शुद्धेन दमेन नियमेन च।
सर्वात्मना च भक्त्या च तुष्टास्मि तव पार्थिव॥ १२॥
अनुवाद
सावित्री बोली - हे राजन! मैं आपके शुद्ध ब्रह्मचर्य, आत्मसंयम, मन के संयम और अनन्य भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ॥ 12॥
Savitri said - O King, I am very pleased with your pure celibacy, self-control, restraint of mind and your whole-hearted devotion.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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