श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 293: राजा अश्वपतिको देवी सावित्रीके वरदानसे सावित्री नामक कन्याकी प्राप्ति तथा सावित्रीका पतिवरणके लिये विभिन्न देशोंमें भ्रमण  »  श्लोक 11-d1
 
 
श्लोक  3.293.11-d1 
रूपिणी तु तदा राजन् दर्शयामास तं नृपम्।
अग्निहोत्रात् समुत्थाय हर्षेण महतान्विता।
उवाच चैनं वरदा वचनं पार्थिवं तदा॥ ११॥
(सा तमश्वपतिं राजन् सावित्री नियमे स्थितम्॥ )
 
 
अनुवाद
राजन! तब अग्निहोत्र से प्रकट हुई भगवती सावित्री देवी ने बड़े हर्ष के साथ राजा को प्रत्यक्ष दर्शन दिया और अनुष्ठान के नियमानुसार वर देने के लिए तत्पर हुए राजा अश्वपति से इस प्रकार कहा।
 
Rajan! Then Goddess Savitri Devi, appearing from the fire of Agnihotra, gave direct darshan to the king with great joy and said thus to King Ashwapati, who was ready to grant the groom, as per the rules of the ritual.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)