युधिष्ठिर बोले, 'हे महामुनि! जिस प्रकार मैं द्रुपद की पुत्री के लिए शोक कर रहा हूँ, वैसा शोक मैं न तो अपने लिए कर रहा हूँ, न इन भाइयों के लिए और न ही राज्य छिन जाने के लिए।'
Yudhishthira said, 'O great sage! The way I grieve for the daughter of Drupada, I do not grieve for myself, nor for these brothers, nor for losing the kingdom.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥