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mahabharat 3.292.7: परंतप! इन सब सहायकों के होते हुए भी तुम दुःखी क्यों हो रहे हो? तुम्हारे ये भाई तो मरुद्गणों सहित वज्रधारी इन्द्र की सेना को भी परास्त कर सकते हैं। 7॥   |   mahabharat अध्याय 3.292: मार्कण्डेयजीके द्वारा राजा युधिष्ठिरको आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 292: मार्कण्डेयजीके द्वारा राजा युधिष्ठिरको आश्वासन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.292.7 
एभि: सहायै: कस्मात् त्वं विषीदसि परंतप।
य इमे वज्रिण: सेनां जयेयु: समरुद्‍गणाम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
परंतप! इन सब सहायकों के होते हुए भी तुम दुःखी क्यों हो रहे हो? तुम्हारे ये भाई तो मरुद्गणों सहित वज्रधारी इन्द्र की सेना को भी परास्त कर सकते हैं। 7॥
 
Parantap! Why do you feel sad in the presence of all these helpers? These brothers of yours can even defeat the army of Indra wielding the thunderbolt along with the Marudganas. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)