Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.292.2: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले नरसिंह! तुम क्षत्रिय हो, शोक मत करो। तुम उस मार्ग पर चल रहे हो, जहाँ केवल अपने ही बाहुबल का अवलम्ब है और जहाँ मनोवांछित फल की प्राप्ति प्रत्यक्ष एवं असंदिग्ध है॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 3.292: मार्कण्डेयजीके द्वारा राजा युधिष्ठिरको आश्वासन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा शुच: पुरुषव्याघ्र क्षत्रियोऽसि परंतप।
बाहुवीर्याश्रिते मार्गे वर्तसे दीप्तनिर्णये॥ २॥
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले नरसिंह! तुम क्षत्रिय हो, शोक मत करो। तुम उस मार्ग पर चल रहे हो, जहाँ केवल अपने ही बाहुबल का अवलम्ब है और जहाँ मनोवांछित फल की प्राप्ति प्रत्यक्ष एवं असंदिग्ध है॥ 2॥
O lion of men who torment the enemies! You are a Kshatriya, do not grieve. You are walking on that path, where only one's own physical strength is relied upon and where the attainment of the desired result is direct and unambiguous.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥