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mahabharat 3.291.9: रथ पर बैठी हुई अत्यंत सुंदरी सीता शोक के कारण क्षीण हो गई थीं। उनके शरीर के सभी अंग मैल से भर गए थे, उनके बाल उलझकर उलझ गए थे और उनके वस्त्र काले पड़ गए थे॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.291.9 
तां दृष्ट्वा चारुसर्वाङ्गीं यानस्थां शोककर्शिताम्।
मलोपचितसर्वाङ्गीं जटिलां कृष्णवाससम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
रथ पर बैठी हुई अत्यंत सुंदरी सीता शोक के कारण क्षीण हो गई थीं। उनके शरीर के सभी अंग मैल से भर गए थे, उनके बाल उलझकर उलझ गए थे और उनके वस्त्र काले पड़ गए थे॥9॥
 
Sitting in the chariot, Sita, who was extremely beautiful, had become thin due to grief. All her body parts were covered with dirt, her hair had become matted and had become matted and her clothes had turned black.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)