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mahabharat 3.291.66: तदनन्तर जब भगवान् विष्णु से सम्बन्धित श्रवण नक्षत्र का पवित्र दिन आया, तब वशिष्ठ और वामदेव दोनों ऋषियों ने मिलकर वीर भगवान् राम का राज्याभिषेक किया॥66॥   |   mahabharat अध्याय 3.291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  3.291.66 
ततस्तं वैष्णवे शूरं नक्षत्रेऽभिमतेऽहनि।
वसिष्ठो वामदेवश्च सहितावभ्यषिञ्चताम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जब भगवान् विष्णु से सम्बन्धित श्रवण नक्षत्र का पवित्र दिन आया, तब वशिष्ठ और वामदेव दोनों ऋषियों ने मिलकर वीर भगवान् राम का राज्याभिषेक किया॥66॥
 
Thereafter, when the holy day of Shravan Nakshatra related to Vishnu deity arrived, both the sages Vashishtha and Vamdev together performed the coronation of the brave Lord Ram. 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)