श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  3.291.50-51h 
इत्येवमुक्त्वानुज्ञाप्य रामं शस्त्रभृतां वरम्॥ ५०॥
सम्पूज्यापाक्रमत् तेन रथेनादित्यवर्चसा।
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ श्री रामजी की आज्ञा लेकर और उनकी पूजा करके मातलि उसी सूर्य के समान तेजस्वी रथ पर सवार होकर स्वर्ग को चले गए॥50 1/2॥
 
Saying this, after taking the permission of Shri Ram, the best among weapon bearers, and worshipping him, Matali went to heaven in the same chariot that was as radiant as the Sun. ॥ 50 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)