श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.291.4 
पूजयित्वा यथा रामं प्रतिजग्मुर्यथागतम्।
तन्महोत्सवसंकाशमासीदाकाशमच्युत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी का विधिपूर्वक पूजन करके वे सब जिस प्रकार आये थे, उसी प्रकार लौट गये। युधिष्ठिर! उस समय आकाश में महान् उत्सव का वातावरण छा गया था।
 
After worshipping Shri Ram properly, they all returned the same way they had come. Yudhishthir! At that time the sky seemed to be filled with great celebrations.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)