vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना
»
श्लोक 37
श्लोक
3.291.37
राम उवाच
अभिवादये त्वां राजेन्द्र यदि त्वं जनको मम।
गमिष्यामि पुरीं रम्यामयोध्यां शासनात् तव॥ ३७॥
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी ने कहा - राजन! यदि आप मेरे पिता हैं तो मैं आपको प्रणाम करता हूँ। आपकी अनुमति से मैं अब सुन्दर अयोध्यापुरी को लौट जाऊँगा।
Shri Ramchandraji said - King! If you are my father then I bow to you. With your permission I will now return to the beautiful Ayodhyapuri.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×