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mahabharat 3.291.32: पूर्वकाल में मेरी कृपा से यह समस्त प्राणियों के लिए अमोघ हो गया था। किसी कारणवश इस पापी की कुछ समय तक उपेक्षा हुई। 32.   |   mahabharat अध्याय 3.291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.291.32 
अवध्य: सर्वभूतानां मत्प्रसादात् पुराभवत्।
कस्माच्चित् कारणात् पाप: कञ्चित् कालमुपेक्षित:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में मेरी कृपा से यह समस्त प्राणियों के लिए अमोघ हो गया था। किसी कारणवश इस पापी की कुछ समय तक उपेक्षा हुई। 32.
 
In the past, due to my grace, he had become inviolable for all living beings. Due to some reason, this sinner was ignored for some time. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)