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mahabharat 3.291.31: हे वीर! यह रावण देवताओं, गन्धर्वों, नागों, यक्षों, राक्षसों और महर्षियों तक का शत्रु था। तुमने उसका वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.291.31 
शत्रुरेष त्वया वीर देवगन्धर्वभोगिनाम्।
यक्षाणां दानवानां च महर्षीणां च पातित:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! यह रावण देवताओं, गन्धर्वों, नागों, यक्षों, राक्षसों और महर्षियों तक का शत्रु था। तुमने उसका वध कर दिया।
 
O brave one! This Ravana was the enemy of the gods, Gandharvas, serpents, Yakshas, ​​demons and even the great sages. You have killed him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)