Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.291.28: अग्निदेव बोले- रघुनन्दन! मैं समस्त प्राणियों के शरीर में निवास करने वाली अग्नि हूँ। मैं जानता हूँ कि मिथिलेशकुमारी ने कभी किंचितमात्र भी पाप नहीं किया है॥ 28॥ | mahabharat अध्याय 3.291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निदेव बोले- रघुनन्दन! मैं समस्त प्राणियों के शरीर में निवास करने वाली अग्नि हूँ। मैं जानता हूँ कि मिथिलेशकुमारी ने कभी किंचितमात्र भी पाप नहीं किया है॥ 28॥
Agnidev said-Raghunandan! I am the fire that resides in the body of all living beings. I know that Mithileshkumari has never committed even the slightest sin.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥