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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.291.27 
वायुरुवाच
भो भो राघव सत्यं वै वायुरस्मि सदागति:।
अपापा मैथिली राजन् संगच्छ सह भार्यया॥ २७॥
 
 
अनुवाद
(आकाश से उस स्वर के रूप में) वायु देवता ने कहा- रघुनन्दन! मैं सदा गमन करने वाला वायु देवता हूँ। सीता ने जो कुछ कहा है, वह सत्य है। हे राजन! मिथिला की पुत्री सर्वथा निष्पाप है। आप निःसंकोच होकर अपनी पत्नी से मिलें।
 
(In the form of that voice from the sky) Vayu Devta said- Raghunandan! I am the ever-moving Vayu Devta. Whatever Sita has said is true. O King! The daughter of Mithila is completely sinless. You should meet your wife without any hesitation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)