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mahabharat 3.291.26: तत्पश्चात् आकाश से एक सुन्दर वाणी प्रकट हुई, जो सब लोगों को सूचित करती थी। वह अत्यन्त पवित्र थी और उन महामनस्वी वानरों को भी आनन्द प्रदान करने वाली थी॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.291.26 
ततोऽन्तरिक्षे वागासीत् सुभगा लोकसाक्षिणी।
पुण्या संहर्षणी तेषां वानराणां महात्मनाम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आकाश से एक सुन्दर वाणी प्रकट हुई, जो सब लोगों को सूचित करती थी। वह अत्यन्त पवित्र थी और उन महामनस्वी वानरों को भी आनन्द प्रदान करने वाली थी॥ 26॥
 
Thereafter a beautiful voice was uttered from the sky, giving testimony to all the people. It was extremely sacred and also brought joy to those great-minded monkeys.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)