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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना
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श्लोक 24
श्लोक
3.291.24
अग्निरापस्तथाऽऽकाशं पृथिवी वायुरेव च।
विमुञ्चन्तु मम प्राणान् यदि पापं चराम्यहम्॥ २४॥
अनुवाद
यदि मैं कोई पाप कर्म करूँ, तो अग्नि, जल, आकाश, पृथ्वी और वायु - ये सब मिलकर मुझे मेरे प्राणों से अलग कर दें ॥24॥
If I commit a sinful act, then the fire, water, sky, earth and air – all of them together may separate me from my life. ॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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