श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.291.20 
ततोऽन्तरिक्षं तत् सर्वं देवगन्धर्वसंकुलम्।
शुशुभे तारकाचित्रं शरदीव नभस्तलम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस समय देवताओं और गन्धर्वों से भरा हुआ सम्पूर्ण आकाश ऐसा सुन्दर प्रतीत हो रहा था मानो शरद ऋतु का आकाश असंख्य तारों से युक्त हो।
 
At that time the entire space filled with Gods and Gandharvas appeared as beautiful as if the autumn sky was dotted with innumerable stars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)