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mahabharat 3.291.14: अचानक ये कठोर वचन सुनकर देवी सीता व्याकुल हो गईं और सहसा गिर पड़ीं, मानो गिरे हुए केले के वृक्ष हों॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.291.14 
तत: सा सहसा बाला तच्छ्रुत्वा दारुणं वच:।
पपात देवी व्यथिता निकृत्ता कदली यथा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अचानक ये कठोर वचन सुनकर देवी सीता व्याकुल हो गईं और सहसा गिर पड़ीं, मानो गिरे हुए केले के वृक्ष हों॥14॥
 
Suddenly, hearing these harsh words, Goddess Sita became distressed and suddenly fell down on the ground like a felled banana tree.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)