श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.291.12 
कथं ह्यस्मद्विधो जातु जानन् धर्मविनिश्चयम्।
परहस्तगतां नारीं मुहूर्तमपि धारयेत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मेरे जैसा धर्म को जानने वाला पुरुष एक क्षण के लिए भी पराई स्त्री को कैसे स्वीकार कर सकता है?॥12॥
 
How can a man like me, who knows the principles of Dharma, accept a woman in the hands of another even for a moment?॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)