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श्लोक  3.290.33 
शरीरधातवो ह्यस्य मांसं रुधिरमेव च।
नेशुर्ब्रह्मास्त्रनिर्दग्धा न च भस्माप्यदृश्यत॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मास्त्र के प्रहार से उसके शरीर की धातु, मांस और रक्त भी जलकर नष्ट हो गए। यहाँ तक कि उसकी राख भी दिखाई नहीं दे रही थी।
 
The metal, flesh and blood of his body were also burnt and destroyed by the Brahmastra. Even his ashes were not visible.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि रामोपाख्यानपर्वणि रावणवधे नवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें रावणवधविषयक दो सौ नब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)