Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.290.29-30: युधिष्ठिर! भगवान राम द्वारा धनुष को दूर तक खींचकर छोड़े गए उस बाण के छूटते ही राक्षसराज रावण अपने रथ, घोड़े और सारथि सहित भयंकर लपटों वाली अग्नि में समा गया हो, ऐसा जलने लगा।   |   mahabharat अध्याय 3.290: राम और रावणका युद्ध तथा रावणका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 290: राम और रावणका युद्ध तथा रावणका वध  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  3.290.29-30 
मुक्तमात्रेण रामेण दूराकृष्टेन भारत॥ २९॥
स तेन राक्षसश्रेष्ठ: सरथ: साश्वसारथि:।
प्रजज्वाल महाज्वालेनाग्निनाभिपरिप्लुत:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! भगवान राम द्वारा धनुष को दूर तक खींचकर छोड़े गए उस बाण के छूटते ही राक्षसराज रावण अपने रथ, घोड़े और सारथि सहित भयंकर लपटों वाली अग्नि में समा गया हो, ऐसा जलने लगा।
 
Yudhishthira! As soon as that arrow shot by Lord Rama after drawing his bow far, the king of demons Ravana started burning along with his chariot, horse and charioteer as if he had been engulfed in a fire with terrible flames.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)