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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 290: राम और रावणका युद्ध तथा रावणका वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.290.22 
तद् दृष्ट्वा दुष्करं कर्म रावणं भयमाविशत्।
तत: क्रुद्ध: ससर्जाशु दशग्रीव: शिताञ्छरान्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उनका कठिन कार्य देखकर दस सिर वाले रावण के मन में भय उत्पन्न हो गया और वह क्रोधित होकर तुरन्त तीखे बाणों की वर्षा करने लगा।
 
Seeing their difficult task, fear filled the mind of the ten-headed Ravana. Then, enraged, he immediately began raining sharp arrows. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)