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mahabharat 3.290.17-18h: महाद्युते! तुम शीघ्र ही इन्द्र के इस रथ पर आरूढ़ हो जाओ।’ तब श्री रामचन्द्र जी ने प्रसन्नतापूर्वक विभीषण से कहा - ‘ठीक है।’ ऐसा कहकर वे रथ पर आरूढ़ हुए और बड़े क्रोध से दस मुख वाले रावण पर टूट पड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.290: राम और रावणका युद्ध तथा रावणका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 290: राम और रावणका युद्ध तथा रावणका वध  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  3.290.17-18h 
तदातिष्ठ रथं शीघ्रमिममैन्द्रं महाद्युते।
तत: प्रहृष्ट: काकुत्स्थस्तथेत्युक्त्वा विभीषणम्॥ १७॥
रथेनाभिपपाताथ दशग्रीवं रुषान्वित:।
 
 
अनुवाद
महाद्युते! तुम शीघ्र ही इन्द्र के इस रथ पर आरूढ़ हो जाओ।’ तब श्री रामचन्द्र जी ने प्रसन्नतापूर्वक विभीषण से कहा - ‘ठीक है।’ ऐसा कहकर वे रथ पर आरूढ़ हुए और बड़े क्रोध से दस मुख वाले रावण पर टूट पड़े।
 
Mahadyute! You quickly mount this chariot of Indra.' Then Shri Ramchandra ji happily said to Vibhishan - 'Okay.' Saying this, he mounted the chariot and attacked the ten-faced Ravana with great fury.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)