Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.290.15-16: मातलि के ऐसा कहने पर श्री रामचंद्रजी को उसके वचनों पर संदेह हुआ, क्योंकि उन्होंने सोचा कि कहीं यह भी राक्षस की माया तो नहीं है। तब विभीषण ने उससे कहा - 'मानसिंह! यह दुष्टात्मा रावण की माया नहीं है।' 15-16.   |   mahabharat अध्याय 3.290: राम और रावणका युद्ध तथा रावणका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 290: राम और रावणका युद्ध तथा रावणका वध  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  3.290.15-16 
इत्युक्तो राघवस्तथ्यं वचोऽशङ्कत मातले:॥ १५॥
मायैषा राक्षसस्येति तमुवाच विभीषण:।
नेयं माया नरव्याघ्र रावणस्य दुरात्मन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मातलि के ऐसा कहने पर श्री रामचंद्रजी को उसके वचनों पर संदेह हुआ, क्योंकि उन्होंने सोचा कि कहीं यह भी राक्षस की माया तो नहीं है। तब विभीषण ने उससे कहा - 'मानसिंह! यह दुष्टात्मा रावण की माया नहीं है।' 15-16.
 
When Matali said this, Shri Ramchandraji doubted his words because he thought that this too might be an illusion of the demon. Then Vibhishan said to him - 'Mansingh! This is not the illusion of the evil soul Ravana. 15-16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)