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mahabharat 3.290.10: राक्षसराज रावण का छल देखकर इक्ष्वाकुवंश को आनन्द पहुँचाने वाले सुमित्रापुत्र लक्ष्मण तनिक भी नहीं घबराए। उन्होंने श्री राम से यह महत्त्वपूर्ण बात कही-॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.290: राम और रावणका युद्ध तथा रावणका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 290: राम और रावणका युद्ध तथा रावणका वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.290.10 
तां दृष्ट्वा राक्षसेन्द्रस्य मायामिक्ष्वाकुनन्दन:।
उवाच रामं सौमित्रिरसम्भ्रान्तो बृहद् वच:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण का छल देखकर इक्ष्वाकुवंश को आनन्द पहुँचाने वाले सुमित्रापुत्र लक्ष्मण तनिक भी नहीं घबराए। उन्होंने श्री राम से यह महत्त्वपूर्ण बात कही-॥10॥
 
Seeing the deceit of the demon king Ravana, Sumitra's son Lakshman, who brings joy to the Ikshvaku clan, did not panic at all. He told this important thing to Shri Ram -॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)