Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.6: क्रोध में आकर वह अनुल्लंघनीय मनुष्यों को भी मार सकता है और वध के योग्य मनुष्यों की भी पूजा करने को तत्पर हो सकता है। इतना ही नहीं, क्रोधी मनुष्य आत्महत्या करके स्वयं को यमलोक का अतिथि भी बना सकता है। ॥6॥ | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रोध में आकर वह अनुल्लंघनीय मनुष्यों को भी मार सकता है और वध के योग्य मनुष्यों की भी पूजा करने को तत्पर हो सकता है। इतना ही नहीं, क्रोधी मनुष्य आत्महत्या करके स्वयं को यमलोक का अतिथि भी बना सकता है। ॥6॥
In anger he can kill even the inviolable men and can be ready to worship even those who are worthy of being killed. Not only this, an angry man can make himself a guest of Yamaloka (by committing suicide). ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥