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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा
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श्लोक 46
श्लोक
3.29.46
पितामह: शान्तनव: शमं सम्पूजयिष्यति।
कृष्णश्च देवकीपुत्र: शमं सम्पूजयिष्यति॥ ४६॥
अनुवाद
मेरे पितामह शान्तनुनन्दन भीष्म केवल शांतिप्रिय लोगों का ही आदर करेंगे। देवकीनन्दन श्रीकृष्ण भी शांतिप्रिय लोगों का ही आदर करेंगे। 46॥
My grandfather Shantanunandan Bhishma will respect only peace-loving people. Devkinandan Shri Krishna will also respect the spirit of peace. 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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