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श्लोक 3.29.44  |
येषां मन्युर्मनुष्याणां क्षमयाभिहत: सदा।
तेषां परतरे लोकास्तस्मात् क्षान्ति: परा मता॥ ४४॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य सदैव क्षमा के द्वारा क्रोध को दबाये रहते हैं, वे उत्तम लोकों को प्राप्त होते हैं। इसलिए क्षमा को श्रेष्ठ माना गया है ॥ 44॥ |
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| Those people whose anger is always suppressed by forgiveness, attain the best of the worlds. Hence forgiveness is considered the best. ॥ 44॥ |
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