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mahabharat 3.29.42: विद्वान पुरुष को सदैव क्षमा का आश्रय लेना चाहिए। जब ​​मनुष्य सब कुछ सहन कर लेता है, तब उसे ब्रह्मभाव प्राप्त होता है। 42.   |   mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.29.42 
क्षन्तव्यमेव सततं पुरुषेण विजानता।
यदा हि क्षमते सर्वं ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष को सदैव क्षमा का आश्रय लेना चाहिए। जब ​​मनुष्य सब कुछ सहन कर लेता है, तब उसे ब्रह्मभाव प्राप्त होता है। 42.
 
A learned man should always take refuge in forgiveness. When a man tolerates everything, then he attains Brahmabhaav. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)