तां क्षमां तादृशीं कृष्णे कथमस्मद्विधस्त्यजेत्।
यस्यां ब्रह्म च सत्यं च यज्ञा लोकाश्च धिष्ठिता:॥ ४१॥
अनुवाद
हे कृष्ण! जिसका माहात्म्य इस प्रकार बताया गया है कि जिसमें ब्रह्म, सत्य, यज्ञ और जगत् प्रतिष्ठित हैं, उस क्षमा को मेरे जैसा मनुष्य कैसे त्याग सकता है?॥41॥
O Krishna! The importance of which has been described as such that in which Brahma, truth, sacrifice and the world are established, how can a person like me give up that forgiveness? ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥